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सारे पूंजीवादी देश विश्वभर में अपना प्रभुत्व स्थापित करना चाहते है ताकि वो दुनियाभर के संसाधनों को चूस सके। इसके बाद इनको ऐसे देशो की जरूरत होती है जो इनके लिए बाजार का काम करे,इसके लिए पूंजीवादी देश ऐसे दूसरे देशों से मित्रता बनाते है जो इनके माल को खरीद सके।इस मित्रता का कोई लगाव नही होता यह सिर्फ और सिर्फ पूंजीवादी देश द्वारा मुनाफे के लिए की जाती है । जिससे उसको बाजार मिल जाए।
अमेरिका दूसरे देशों को हथियार बेचता है जो उसका सबसे बड़ा धंधा है।जब तक कोई देश उससे हथियार खरीदता है वह उसका मित्र बना रहता है जिस दिन दूसरा देश हथियार खरीदना बन्द करे उसी दिन से वह देश अमेरिका का दुश्मन और उसे सम्पूर्ण विश्व के लिए खतरा बता कर हमला किया जाता है और उस देश के संसाधनों को 2-3 पूंजीवादी देश लूट ले जाते है। इसके अनेक उदाहरण हमारे सामने है और आने वाले समय मे ओर भी आएंगे।
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| India-u.s-relation |
अमेरिका की एक ओर खास बात है यह अपने मित्र देशो पर भी तानाशाही चलाता है तथा उनको जबरन हथियार बेचता है।कमजोर देशो की स्थिति तो समझ सकते है लेकिन जब बड़े व मजबूत देश भी इन पूंजीवादी देशो के सामने झुकते है तो यह उस देश की कमजोरी नही वरन उस देश के कमजोर इच्छाशक्ति वाले राजनैतिक शासक की कमजोरी को दर्शाता है जो यह समझता है हम कुछ नही बना सकते हमे इन पूंजीवादी देशो पर ही निर्भर रहना होगा।
इस सबके बीच आमजन पिसता है जिसके हिस्से के संसाधन पहले उस देश के पूंजीवादी चूसते है उसके बाद बचे कूचे को ये पूंजीवादी देश चूस ले जाते है,जो बड़ा ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
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'आज़ाद'


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